धान की एस.आर.आई. विधि: SRI System of Rice Intensification के लाभ
- Prof. Bhagwan Deen

- 19 जन॰
- 4 मिनट पठन
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां धान (चावल) मुख्य खाद्य फसल है। पारंपरिक रूप से धान की खेती के लिए काफी मात्रा में पानी, बीज और मेहनत की जरूरत होती है। हालांकि, बदलते समय में, जब जल स्तर कम हो रहा है और खेती की लागत बढ़ रही है, एस.आर.आई. (SRI) विधि, जिसे 'श्री विधि' भी कहा जाता है, किसानों के लिए एक वरदान बनकर उभर रही है। इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि एस.आर.आई. विधि क्या है, इसके लाभ क्या हैं और इसे अपनाने का सही तरीका क्या है।
1. एस.आर.आई. (SRI) विधि क्या है? (What is SRI?)
SRI का पूरा नाम System of Rice Intensification है। हिंदी में इसे 'सघन धान पद्धति' या स्थानीय भाषा में 'श्री विधि' के रूप में जाना जाता है। इस तकनीक को 1980 के दशक में मेडागास्कर में फादर हेनरी डी लाउलानी ने विकसित किया था। यह धान की खेती के लिए कोई नया बीज नहीं है, बल्कि यह एक प्रबंधन विधि है जिसमें कम बीज, कम पानी और अधिक जैविक खाद का उपयोग करके पौधों की जड़ों का विकास किया जाता है।
इसका मूल मंत्र है: "कम से भी ज्यादा पैदावार" (More from Less)।
2. पारंपरिक विधि बनाम एस.आर.आई. विधि Classical vs SRI Methods
विशेषता | पारंपरिक विधि | एस.आर.आई. (SRI) विधि |
बीज की मात्रा | 30-40 किलो प्रति हेक्टेयर | 5-6 किलो प्रति हेक्टेयर |
पौधे की उम्र | 25-30 दिन के पौधे | केवल 10-12 दिन के छोटे पौधे |
रोपाई की दूरी | पास-पास (अनिश्चित) | 25 x 25 सेंटीमीटर (निश्चित दूरी) |
पानी का प्रबंधन | खेत हमेशा पानी से भरा रहता है | केवल नमी बनाए रखनी होती है |
खरपतवार नियंत्रण | हाथ से निराई | 'कोनो वीडर' मशीन का उपयोग |
3. एस.आर.आई. विधि के मुख्य सिद्धांत (Core Principles of System of Rice Intensification)
एस.आर.आई. विधि चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है:
* जल्द रोपाई: पौधों की रोपाई तब करें जब उनमें केवल दो पत्तियां हों।
* दूरी का प्रबंधन: पौधों को पर्याप्त जगह दें ताकि उनकी जड़ों और शाखाओं (Tillers) का विस्तार हो सके।
* मिट्टी का स्वास्थ्य: रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद (कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट) को प्राथमिकता दें।
* न्यूनतम पानी: खेत को जलमग्न रखने के बजाय केवल 'गीला और सूखा' (AWD) रखें।
4. एस.आर.आई. विधि से खेती की प्रक्रिया (Step-by-Step Process)
क. नर्सरी तैयार करना
एस.आर.आई. में नर्सरी बहुत छोटी होती है। प्रति एकड़ मात्र 2 किलो बीज पर्याप्त है।
* बीज को पहले नमक के पानी में डालकर हल्के बीजों को हटा दें।
* अच्छे बीजों को 24 घंटे भिगोकर रखें और फिर अंकुरण के लिए बोरे में ढक कर रखें।
* नर्सरी बेड पर खाद बिछाकर अंकुरित बीज डालें।
ख. खेत की तैयारी और रोपाई
* खेत को अच्छी तरह समतल करें ताकि पानी हर जगह समान रूप से पहुँचे।
* रोपाई के लिए खेत में कीचड़ (Puddling) जैसा माहौल हो, लेकिन पानी खड़ा न हो।
* दूरी: रस्सी या मार्कर की मदद से 25x25 सेमी की दूरी पर निशान लगाएँ।
* सावधानी: नर्सरी से पौधे निकालते समय ध्यान रखें कि जड़ों के साथ मिट्टी लगी रहे। पौधे को बहुत गहरा न रोपें, इसे मिट्टी की ऊपरी सतह पर धीरे से रखें।
ग. जल प्रबंधन (Water Management in System of Rice Intensification)
पारंपरिक खेती में माना जाता है कि धान एक जलीय पौधा है, लेकिन एस.आर.आई. कहता है कि धान पानी में जीवित तो रह सकता है पर वह जलीय पौधा नहीं है।
* खेत में दरारें आने से पहले हल्की सिंचाई करें।
* इससे जड़ों को हवा (Oxygen) मिलती है, जिससे वे अधिक गहराई तक जाती हैं।
घ. खरपतवार नियंत्रण (Weeding)
चूँकि खेत खाली और नमी वाला होता है, इसलिए खरपतवार अधिक उगते हैं। इसके लिए 'कोनो वीडर' (Cono Weeder) मशीन का प्रयोग करें।
* यह मशीन खरपतवार को मिट्टी में ही दबा देती है, जो बाद में खाद का काम करती है।
* रोपाई के 15, 25 और 35 दिन बाद वीडर चलाना अनिवार्य है।
5. एस.आर.आई. विधि के चमत्कारिक लाभ
* बीज की बचत: जहाँ साधारण विधि में भारी मात्रा में बीज लगता है, यहाँ 80% बीज की बचत होती है।
* पानी की 40-50% बचत: सिंचाई के पानी की भारी कमी वाले क्षेत्रों के लिए यह सर्वोत्तम है।
* अधिक कल्ले (Tillers): एक पौधे से 40 से 80 कल्ले निकलते हैं, जबकि सामान्य विधि में 10-15 ही निकलते हैं।
* मजबूत तना: पौधे मजबूत होते हैं, जिससे तेज हवा या बारिश में फसल गिरती नहीं है।
* पर्यावरण के अनुकूल: इस विधि में मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होता है, जो ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में सहायक है।
6. चुनौतियाँ और सावधानियाँ
यद्यपि यह विधि बहुत लाभकारी है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
* कुशल श्रमिक: छोटे पौधों की रोपाई के लिए प्रशिक्षित श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
* शुरुआती मेहनत: कोनो वीडर चलाने में शुरू में अधिक मेहनत लगती है।
* समतल भूमि: ऊबड़-खाबड़ खेत में यह विधि सफल नहीं हो पाती।
7. निष्कर्ष
धान की एस.आर.आई. विधि न केवल उत्पादन बढ़ाने का जरिया है, बल्कि यह खेती को टिकाऊ (Sustainable) बनाने का एक मार्ग है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इस पद्धति को अपनाते हैं, तो वे अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं और साथ ही प्रकृति के अनमोल संसाधन 'जल' को भी बचा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या एस.आर.आई. विधि के लिए विशेष बीज की जरूरत होती है?
नहीं, आप अपनी पसंद की किसी भी उन्नत या संकर (Hybrid) किस्म का उपयोग कर सकते हैं।
Q2. क्या इसमें उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है?
हाँ, लेकिन जैविक खाद का अधिक उपयोग मिट्टी की संरचना में सुधार करता है जो एस.आर.आई. के लिए बेहतर है।
Q3. क्या यह विधि सभी प्रकार की मिट्टी के लिए उपयुक्त है?
यह जल निकासी वाली लगभग सभी प्रकार की मिट्टियों में सफल है, लेकिन बहुत अधिक जलभराव वाले निचले क्षेत्रों में थोड़ी कठिनाई हो सकती है।


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